भगवान के डाकिए कवि- रामधारी सिंह 'दिनकर'कक्षा -8 सारांश भगवान के डाकिए नामक इस कविता में कवि ने पक्षी और बादल को भगवान का डाकिया बताया है जो मनुष्य को प्रेम त्याग और सद्भावना का संदेश देते हैं । कवि पक्षी और बादल का संबंध मनुष्य से जोड़ते हुए कहते हैं कि यह दोनों भगवान के डाकिए है । जिस प्रकार डाकिया हमारे प्रिय जनों का संदेश लाता है, उसी प्रकार यह प्राकृतिक डाकिया भगवान का सन्देश हमारे लिए का लाता है । यह डाकिया किसी स्थान विशेष के लिए संदेश नहीं लाते हैं । पक्षी आकाश में यहां वहां भ्रमण करते हैं तथा बादल घुमड़ घुमड़ कर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं । इनका विचरण देखकर ऐसा लगता है कि मानो यह भगवान के डाकिए है, जो भगवान का संदेश लेकर पूरी पृथ्वी पर घूम रहे हैं । ये यह संदेश मनुष्यों में बांटते हैं , परंतु मनुष्य अपनी अज्ञानता के कारण समझ नहीं पाते हैं । इन प्राकृतिक डाकियो द्वारा लाई चिट्ठियों को पर्वत, पेड़ पौधे और नदियां पढ़ती है । पेड़ पौधे अपनी वायु, धरती अपनी सुगंध तथा नदिया अपना जल किसी सीमा ...