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Subhash Jayanti Celebrate as Parakram Divas

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  SUBHASH JAYANTI CELEBRATE AS PRAKRAM DIVAS मोदी सरकार की घोषणा - सुभाष जयंती  मनाया जाएगा,"पराक्रम दिवस " के रूप में Subhas jayanti celebrate as parakarm divas मोदी सरकार ने प्रतिवर्ष 23 जनवरी को नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया है ताकि देश के लोगों, विशेषकर युवाओं अपने भाग्य और आपदाओं का सामना करने के लिए प्रेरित किया जा सके. भारत सरकार ने हर साल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को 'पराक्रम दिवस' के तौर पर मनाने का फैसला किया है ताकि उनकी भावना से देश के युवाओं को प्रेरित किया जा सके.   यह वर्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस का 125वां जयंती वर्ष है और भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूमधाम से मनाने का फैसला किया है. उद्देश्य केंद्र ने देश के लोगों, विशेषकर युवाओं को प्रेरित करने के लिए  साल 23 जनवरी को आने वाली  नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया है, ताकि युवा अपने जीवन में आने वाली किसी भी आपदा के दौरान बहादुरी से काम करें जैसेकि नेताजी ने अपने जीवन में सभी प्रतिकूल परिस्थितिय...

Guru Govind singh university|Guru govind singh jayanti|

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  गुरु गोविंद सिंह (1675-1708 ई०)  गुरु गोविंद सिंह सिंह जी का जन्म बिहार के पटना में हुआ था। आप सिक्खों के दसवें और अंतिम गुरु थे। आपके बाद गुरु ग्रंथ साहब को गुरु मान लिया गया। इन्होंने अपने विचारों को व्यवहार में परिणत करने के लिए 1699 ई० में " दल खालसा "की स्थापना की। गुरु गोविंद सिंह जी ने आदि ग्रंथ को" दसम पादशाह का ग्रंथ " के  नाम से संकलित करवाया।  गुरु गोविंद सिंह जी ने सिखों को सैनिक संप्रदाय "खालसा" में परिवर्तित कर दिया। सिखों के लिए "पंच ककार "  केश, कच्छा,कडा, कंघा व कृपाण  को अनिवार्य कर दिया।  उन्होंने पाहुल नाम का एक त्यौहार चलाया। गुरु गोविंद सिंह जी ने सिंह जी ने पहाड़ी प्रदेश हिमाचल प्रदेश स्थान की स्थापना की जिसका पुराना नाम पाओन्टा था।  वहीं पर सैनिकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें लड़ाकू सैनिक बनाया। गोविंद सिंह जी ने कृष्ण अवतार नामक ग्रंथ की रचना वहीं पर किया था। आप की आत्मकथा का  नाम विचित्र नाटक है। गुरु गोविंद सिंह जी ने सिंह जी ने सिखों की सैनिक शक्ति की सुदृढ़ता हेतु लौहगढ़, फतेहगढ़ ,आनंदगढ़ और केशगढ़ के किले का...

मौर्य साम्राज्य का संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य

           चंद्रगुप्त मौर्य ( 323 ईसा पूर्व से 295 ईसा पूर्व)  मौर्य वंश की स्थापना चाणक्य की सहायता से अंतिम नंद शासक धनानंद को पराजित कर चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य वंश की स्थापना की। 🌳 चंद्रगुप्त मौर्य के जाति के संबंध में विद्वानों में एकमत नहीं है। ब्राह्मण साहित्य ने शूद्र तथा बौद्ध एवं जैन ग्रंथ इन्हें क्षत्रिय कुल में उत्पन्न  बताते हैं। 🌳 यूनानी लोग चंद्रगुप्त को सेंडरो कोट्स कहते थे। 🌳 यूनानी लेखक  के अनुसार चंद्रगुप्त ने छह लाख की सेना लेकर संपूर्ण भारत को   रौध डाला  । 🌳 305 ईसा पूर्व चंद्रगुप्त ने तात्कालिक यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया। संधि हो जाने के बाद सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त से 500 हाथी लेकर बदले में हेरात, कंधार, और काबुल के कुछ भाग चंद्रगुप्त को दिए। 🌳 सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त से करवा दिया और उपयुक्त  चारों प्रांत चंद्रगुप्त को दहेज स्वरूप दे दिया और  मेगस्थनीज अपने राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा। 🌳 चंद्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य ईरान से लेकर पूर्व...